सबूत होने के बावजूद नाम वोटर लिस्ट से नाम कटा, नेत्रहीन महिला ने उठाई न्याय की गुहार
कोलकाता, 11 अप्रैल। कोलकाता के व्यस्त व्यावसायिक इलाके बड़ाबाजार से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड 42 अंतर्गत 125/1 कॉटन स्ट्रीट की रहने वाली नेत्रहीन महिला रानी जालान का नाम विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटा दिया गया है। इस घटना से न केवल रानी जालान, बल्कि उनके पूरे परिवार को गहरा आघात पहुंचा है।रानी जालान जन्म से नेत्रहीन हैं और अपने दैनिक जीवन के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर रहती हैं। उनके पति विनीत जालान भी दिव्यांग हैं, जिनके दोनों पैर नहीं हैं। ऐसे में यह दंपत्ति पहले ही जीवन की कठिन परिस्थितियों से जूझ रहा है। अब मतदाता सूची से नाम कटने की घटना ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
रानी जालान का कहना है कि उनके पास सभी वैध और आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास वोटर आईडी कार्ड, आधार कार्ड, आवासीय प्रमाणपत्र और बैंक खाता सहित सभी जरूरी कागजात हैं, जो उनकी पहचान और निवास को प्रमाणित करते हैं। इसके बावजूद बिना किसी स्पष्ट कारण के उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया। रानी ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) और एआरओ (असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर) के पास जाकर अपने दस्तावेज जमा किए, लेकिन उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ।उन्होंने कहा कि मैंने हर जरूरी कागज दिखाया, फिर भी मेरा नाम काट दिया गया। मैं समझ नहीं पा रही हूं कि मेरी गलती क्या है। अब मैं बेहद निराश हूं और मुझे कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। उनकी आवाज में निराशा और पीड़ा साफ झलकती है।वहीं, उनके पति विनीत जालान ने भी अपनी बेबसी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मैं खुद अपाहिज हूं, चल-फिर नहीं सकता। मेरी पत्नी नेत्रहीन है। हम दोनों ही अपनी स्थिति में बहुत संघर्ष कर रहे हैं। अब जब वोट देने का अधिकार भी छिन गया, तो समझ नहीं आ रहा कि क्या करें।
उनका कहना है कि इस स्थिति में सरकारी तंत्र से मदद की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें सिर्फ निराशा हाथ लगी।इस पूरे मामले ने स्थानीय राजनीतिक माहौल को भी गरमा दिया है। क्षेत्र के पार्षद महेश शर्मा ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एसआईआर के नाम पर पारदर्शिता की बात की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सही जांच-पड़ताल के लोगों के नाम काटे जा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है।महेश शर्मा ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक नेत्रहीन महिला, जिसके पास सभी वैध दस्तावेज हैं, उसका नाम भी सूची से हटा दिया गया। इससे साफ पता चलता है कि प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं। चुनाव आयोग को इस मामले की तुरंत जांच करनी चाहिए और रानी जालान का नाम पुन: जोड़ा जाना चाहिए।
इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या एसआईआर प्रक्रिया वास्तव में पारदर्शी और निष्पक्ष है, या फिर इसमें प्रशासनिक लापरवाही और त्रुटियां शामिल हैं। खासकर जब मामला दिव्यांग व्यक्तियों का हो, तब प्रशासन से संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की अपेक्षा और भी बढ़ जाती है।रानी जालान ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी समस्या का समाधान जरूर होगा। उन्होंने कहा कि मुझे दीदी पर पूरा भरोसा है। अगर उनकी सरकार फिर से आती है, तो मेरा नाम जरूर जुड़ जाएगा।